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भोजपुरिया अमन के बढ़त डेग

On: Sunday, June 8, 2025 4:05 PM
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भोजपुरी अध्ययन केन्द्र में रामजियावन दास ‘बावला’

भोजपुरी अध्ययन केन्द्र में रामजियावन दास ‘बावला’ के सिरजन आ सरोकार विषय पर भईल वैचारिक संगोष्ठी
-एह अवसर पर ‘भोजपुरिया अमन’ के कबीरदास विशेषांक कऽ भइल लोकार्पण।
वाराणसी, 27 जुलाई 2024। ‘भिखारी ठाकुर स्मृति व्याख्यान माला’ के अन्तर्गत शोध संवाद समूह कऽ ‘रामजियावन दास ‘बावला’ सृजन और सरोकार’ विषयक वैचारिक संगोष्ठी भोजपुरी अध्ययन केन्द्र, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के राहुल सभागार में सम्पन्न भइल। अतिथियन कऽ स्वागत करत केन्द्र कऽ समन्वयक प्रो. प्रभाकर सिंह कहले कि बावला जी गंवई चेतना कऽ दमगर दस्तखत हवे। गंवई जीवन कऽ अलग-अगल रूप उनकरे रचना में देखल जा सकेला। बावला जी के तरे हम लोगन के भी अब मेगा नैरेटिव के जगह स्माल नैरेटिव पे बात करे के चाही। गिरीडीह से आइल मुख्य अतिथि भोजपुरी के कवि आ आलोचक डाॅ0 बलभद्र जी कहले कि बावला जी असल में लोकजीवन के लोकभाषा कऽ किसान कवि हवे। उ शिव आ राम पर तऽ कविताई कइलइ हवे, बाकि खेती किसानी खुब मजगर कविता लिखले हवे। भारतीय संस्कृति कऽ खास बात हऽ कि कवनो काम-काज शुरू करे से पहिले लोग अपने अराध्य के याद करे ले। इसे कारण रहे कि बावला जी भगवान शिव आ राम के याद करत आपन कविताई कऽ दिनचर्या शुरू करत रहे। बाकि उनकर कविता खेती-किसानी आ लोकजीवन के आसे-पास चलत रहे। कविता जेतना कहेला, ओसे अधिका ओके सुने के पड़ेला, तब जाके ओके अपने समय के साथे जोड़ के देखलआ समझल जा सकेला। बावला जी कऽ ‘जेब कट
गइल थाने में’, ‘नमन बाटै’, ‘होत बा विकास’ जइसन कविता ऐकर उदाहरण हऽ
देवरिया से आइल ‘भोजपुरिया अमन’ (तिमाही भोजपुरी पत्रिका) के प्रधान संपादक डाॅ0 जनार्दन सिंह बावला जी कऽ जीवन संघर्ष यात्रा के बतावत कहले कि बावला जी जनकवि रहले। उ कभ्भो कवि बनके कवनो कविता ना लिखले बल्कि साधारण गंवई जीवन जीयत जवन कुछ अनुभव कइले ओके कविता के रूप दे दिहले। उनकरे गंवई संवेदना में लोक कऽ गंध रहे। ऐकरे साथे डाॅ0 जनार्दन सिंह लोगन से रचनात्मक सहयोग कऽ निहोरा करत घोषणा कइले की ‘भोजपुरिया अमन’ के अगला अंक रामजियावन दास ‘बावला’ पर विशेषांक छपी।
कार्यक्रम कऽ अध्यक्षता करत भोजपुरी अध्ययन केन्द्र के संस्थापक समन्वयक प्रो. सदानंद शाही कहले कि तुलसीदास कऽ जेतना प्रभाव अवधी समाज पर हवे ओतनही प्रभाव भोजपुरी समाज पर भी हवे। भोजपुरी में रामचरित मानस आ पदमावत लिखले कऽ बहुत संभावना हऽ कवि लोगन कऽ दायित्व हवे कि उ वंचित आ शोषित लोगन के पहिले जगह देवे। बावला जी यही कइले। उ आपादमस्तक कवि रहले, कविता उनकरे जीवन से रिसत रहे। कार्यक्रम कऽ शुरूआत कुलगीत से भइल। ऐकरे बाद भोजपुरी तिमाही पत्रिका ‘भोजपुरिया अमन’ के कबीरदास विशेषांक कऽ लोकार्पण भइल। कार्यक्रम कऽ संचालन डाॅ0 अमित कुमार पाण्डेय कइले आ धन्यवाद ज्ञापन आर्यपुत्र दीपक दिहले। ऐह अवसर पर प्रो. नीरज खरे, डाॅ0 उर्वशी गहलौत, डाॅ0 अशोक ज्योति, डाॅ0 विवेक सिंह, डाॅ0 प्रभात मिश्रा, डाॅ0 रवि सोनकर, डाॅ0 धीरज कुमार गुप्ता, डाॅ0 शत्रुघ्न मिश्रा सहित केन्द्र कऽ शोधार्थी लोग उपस्थित रहले।
बी.एच.यू. वाराणसी के भोजपुरी अध्यान के केन्दे के सभागार में भोजपुररिया अमन पत्रिका के लोकार्पण करत प्रो. सदानन्द शाही, प्रो. प्रभाकर सिंह, डॉ. बलभद्र, प्रो. अशोक ज्योति, डॉ. जर्नादन सिंह अउर रामजीयावन दास बावला के परपोता कौशिक विश्वकर्मा ।

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